अधपन्ना
समाज ने मुझे क्या सिखाया या समाज से मैं क्या सीखा , बतौर अनुभव उनकी रसीद ......
Showing posts with label
विषण्ण
.
Show all posts
Showing posts with label
विषण्ण
.
Show all posts
Saturday, 16 November 2019
बेरहमी
चुभती है पैरों में
सर कुरेदती
कोई कील-सी
मुस्कान चहरे पर
विषण्ण-सी
Older Posts
Home
Subscribe to:
Posts (Atom)